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उदासीनता शोर शब्दों का समझ पाया नहीं, भाषणों का अर्थ मन भाया नहीं, नींद मेरी और गहरी हो गयी, झर गये मेरे नयन के सब सपन।
बात उससे की तो वह समझा नहीं, अपनी कहता था मेरी सुनता नहीं, कहने सुनने की रही अब बात क्या, अब न साजन है... सपूंण
उलझन चंन्द्र किरणों मे नहा कर, दुख भरी धुन गुनगुनाऐं, झिलमिली तारों के दुनिया, आसुओं की ओट लाऐं।
रात शीतल है बहुत, आग साँसों में लगा लें, कैसी हलचल है हवा में, आस के दीपक जला लें। अपनी आहों से किसी की, बाँसुरी के स्वर जगायें।
शवेत चादर की... सपूंण
पिया और पपीहा चढ़ी अटारी बाट निहारी, मन्नत माँगी भेजी पतिया। गिन गिन काटे दिन सावन के, थका पपीहा रट रट पिया।
सूना आँगन सूनी बगिया, फीकी मेंहदी रोता दिया, याद पिया की पल पल आये, ठहरा जाये हर पल जिया।
धुँधला दर्पण भीगा आँचल, तन मन आतुर बेकल हिया, आँखें... सपूंण
सूरज है सिन्दूरी बेले की पंखुड़ियों पर शबनम धूप तापती है, भौंरौं की गुनगुन में यह कैसी व्यथा व्यापती है।
पत्तियाँ बजाती झाँझर, झींगुर पीर सुनाते हैं, छाया पेड़ों से अलग किसी के राह नापती है।
सुप्रभात का बादल क्या सन्देशा लाता है, कोयल की आवाज़ किसलिए आज काँपती है। सपूंण
प्रतीक्षा नयन भरे नीर से, क्यों अधर अधीर से, ह्रदय सुगबुगा उठा है, एक नयी पीर से।
खुले द्वार थक गये, देहरी उदास है, दीप सभी बुझ गये, सुबह बहुत पास है। राह रुक गयी कहीं, या डगर भटक गई, इन्तज़ार बढ़ रहे हैं द्रौपदी के चीर से।
नयन... सपूंण
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