o यह भी क्या कोई लिखने की बात है।
o आत्म निवेदन
o प्रतीक्षा
o सूरज है सिन्दूरी
o पिया और पपीहा
o उलझन
o उदासीनता
o हरीश गुरु
o आदि गुरु
o मेरा संगीत का सफ़र
o किताबें ही किताबें
o छपने छपाने की बात
o मैं बोलता क्या हूँ?
o सठिया जाने का मामला
o जादूगर गुरु
o मदारी दरवाज़े की बात
o कुछ कहने न कहने की बातें ।
o समझता तो हूँ पर कहता नहीं हूँ
o मै खाता क्या हूँ
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लेख कविताऐं



प्रतीक्षा

नयन भरे नीर से, क्यों अधर अधीर से,
ह्रदय सुगबुगा उठा है, एक नयी पीर से।

खुले द्वार थक गये, देहरी उदास है,
दीप सभी बुझ गये, सुबह बहुत पास है।
राह रुक गयी कहीं, या डगर भटक गई,
इन्तज़ार बढ़ रहे हैं द्रौपदी के चीर से।

नयन झपकते नहीं, न चूड़ियाँ खनक रहीं,
अनगिनत शिकायतें, कंठ में अटक रहीं,
आस रही अनफली, बंद बंद है कली,
विरह गंध उड़ रही है, अनछुए शरीर से।

सेज बेशिकन रही, स्वप्न हैं छले छले,
नयन कोर पर रुके, अश्रु चले अब चले,
चाँद की टेढ़ी नज़र, मन जला जला गई,
पोर पोर झुलस गया, सन्दली समीर से।



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