o यह भी क्या कोई लिखने की बात है।
o आत्म निवेदन
o प्रतीक्षा
o सूरज है सिन्दूरी
o पिया और पपीहा
o उलझन
o उदासीनता
o हरीश गुरु
o आदि गुरु
o मेरा संगीत का सफ़र
o किताबें ही किताबें
o छपने छपाने की बात
o मैं बोलता क्या हूँ?
o सठिया जाने का मामला
o जादूगर गुरु
o मदारी दरवाज़े की बात
o कुछ कहने न कहने की बातें ।
o समझता तो हूँ पर कहता नहीं हूँ
o मै खाता क्या हूँ
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लेख कविताऐं



सूरज है सिन्दूरी

बेले की पंखुड़ियों पर शबनम धूप तापती है,
भौंरौं की गुनगुन में यह कैसी व्यथा व्यापती है।

पत्तियाँ बजाती झाँझर, झींगुर पीर सुनाते हैं,
छाया पेड़ों से अलग किसी के राह नापती है।

सुप्रभात का बादल क्या सन्देशा लाता है,
कोयल की आवाज़ किसलिए आज काँपती है।

ख्यालों ही ख्यालों किस प्रीतम के चर्चे हैं,
सांस लाजवंती की हरदम क्या पुकारती है।

जाने किसके स्वागत में सूरज है सिन्दूरी,
मन मन्दिर में होती किसकी रोज़ आरती है।



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