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चढ़ी अटारी बाट निहारी, मन्नत माँगी भेजी पतिया। गिन गिन काटे दिन सावन के, थका पपीहा रट रट पिया।
सूना आँगन सूनी बगिया, फीकी मेंहदी रोता दिया, याद पिया की पल पल आये, ठहरा जाये हर पल जिया।
धुँधला दर्पण भीगा आँचल, तन मन आतुर बेकल हिया, आँखें हर पल भर भर आयें, आंख परे मनमोहक पिया।
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