o यह भी क्या कोई लिखने की बात है।
o आत्म निवेदन
o प्रतीक्षा
o सूरज है सिन्दूरी
o पिया और पपीहा
o उलझन
o उदासीनता
o हरीश गुरु
o आदि गुरु
o मेरा संगीत का सफ़र
o किताबें ही किताबें
o छपने छपाने की बात
o मैं बोलता क्या हूँ?
o सठिया जाने का मामला
o जादूगर गुरु
o मदारी दरवाज़े की बात
o कुछ कहने न कहने की बातें ।
o समझता तो हूँ पर कहता नहीं हूँ
o मै खाता क्या हूँ
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लेख कविताऐं



उलझन

चंन्द्र किरणों मे नहा कर, दुख भरी धुन गुनगुनाऐं,
झिलमिली तारों के दुनिया, आसुओं की ओट लाऐं।

रात शीतल है बहुत, आग साँसों में लगा लें,
कैसी हलचल है हवा में, आस के दीपक जला लें।
अपनी आहों से किसी की, बाँसुरी के स्वर जगायें।

शवेत चादर की सलों में ज़िन्दगी की राह ढूँढ़े,
कल कहाँ सूरज उगेगा, रातरानी से यह पूँछे।
एक करवट में सिमट लें, न सुने कुछ न सुनायें।

अपने जीवन के सफ़ों में, शोधनों के चिन्ह ढूँढ़े,
लाल स्याही में छुपाई, अपनी ही कालिमा छू लें,
धूल इतिहास की अपने, फूँक भर भर के उड़ाऐं।

चंन्द्र किरणों मे नहा कर दुख भरी धुन गुनगुनाऐं।



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