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निरंजन माथुर का नाम हो सकता है आपने न सुना हो पर यह हाथ की सफ़ाई के बहुत बड़े उस्ताद और मेरे मित्र थे। जब जादू जगत में इनका नाम होना ही शुरु हुआ था इनकी अकाल मृत्यु हो गई।
जादूगर तरह तरह के होते हैं। मैली कमीज़ और पजामा पहने या तहमद बाँधे सड़क के किनारे मजमा लगा कर तमाशा दिखाने वाला मदारी सबसे कुशल जादूगर होता है। लोगों का मजमा इसे चारों तरफ से घेरे रहता है और इनके पास एक टोकरी या पिटारी के सिवाय कोई बहुत तामझाम नहीं होता। छुपने छुपाने की कोई जगह यहाँ नहीं होती है। हाँ मैले कुचैले कपड़े पहने हुए एक जमूरा ज़रुर होता है। इनका जादू खुले मैदान में होता है और हाथ की सफ़ाई के साथ शब्दों की लफ़्फ़ज़ी से अपका ध्यान बँटाने की कला से खेला जाता है। यह सबसे ईमानदारी का तमाशा होता है। कोई टिकट या कोई एडवान्स पेमेन्ट यहाँ नहीं है। अगर डुगडुगी की आवाज़ और मदारी की लच्छेदार बातें आपके कदम दो मिनट के लिये रोक लें तो आप इस खेल में शामिल हो जाते हैं। दिन की रोशनी में और खुले मैदान में यह खेल होता है। यहाँ लाइटों का, पर्दों का, छुपे हुए ट्रैप दरवाज़ों का या ख़ास तौर पर बनाई हुई मेज़ों और अलमारीयों के लिये भी कोई जगह नहीं है। हिन्दुस्तान की मशहूर रोप ट्रिक का काम इन्हीं जैसे मदारीयों द्वारा किया जाता था। एक छोटी सी पिटारी से एक रस्सी निकाल कर हवा में फेंक दी जाती थी और वह तन कर हवा में खड़ी हो जाती थी। जमूरा झट से उस पर चढ़ कर हवा में ग़ायब हो जाता और बहुत गाली गलौज के बाद भी नीचे नहीं आता। मदारी भी जमूरे की तलाश में रस्सी पर चढ़ कर उपर जाता था। मैं यह तो बताना ही भुल गया कि उसके मुँह में एक कटार भी दबी होती थी। लगता कि मदारी ने जमूरे को पकड़ लिया है और उसे सज़ा देने पर ऊतारु है। जमूरे के शरीर के हिस्से नीचे गिरने लगते और लगता है कि मदारी ने नीचे आने से पहले उसका काम तमाम कर दिया है। मजमा इस बात बहुत दुखी और नाराज़ हो जाता और यह डिमांड की जाती कि मदारी जमूरे को फिर से ज़िन्दा करे। बहुत मिन्नत मनाने और पैसे देने पर मदारी इस बात के लिये तैयार हो जाता । काली कलकत्ते वाली के नाम पर जिसका वचन न जाये ख़ाली, मंत्र आदि पढ़ने और थोड़ा सा ड्रामा करने पर जमूरा उस छोटी सी पिटारी में से ज़िन्दा निकल आता । यह जादू कैसे होता है इसका राज़ अभी तक नहीं खुल पाया है। मजमे में खड़े हुऐ कुछ लोग तो बीच में से खिसक लेते है कि जेब से कुछ रेज़गारी निकाल कर न फेंकनी पड़ें। पाठक, मुफ़्तख़ोरों की हमारे यहाँ कोई कमी नहीं है। मदारी इसी पिटारी में जमूरे को बन्द करके उसे सज़ा देने के लिए बहुत सी तलवारें भी घुसा देता। जमूरा फिर भी साबित निकल आता । पिटारे में ऐसे लेटना कि तलवारें बदन को न छू सकें बड़ा मुशकिल काम है। यही रोप ट्रिक जब अँग्रेज़ों को देखाई गयी तो इस ट्रिक का ख़ुलासा करने के लिए बहुत कोशिशें की हई पर वाह रे मदारी कि राज़ आज तक राज़ है। इन सब ख़ूबियाँ से कुछ ख़ास आमदनी नही़ होती और ज्यादातर मदारी ग़रीब ही रहते हैं।
भड़कीले कपड़े पहन कर बड़े हालों में जादू दिखाने वाले पी सी सरकार जैसे जादूगर मजमे की इमानदारी का ऐतबार नहीं करते हैं और चिल्लर से इनका काम नहीं चलता है। यह टिकट बेच कर पैसे पहले ही ले लेते हैं। इनके सहायक मैले कुचैले जमूरे नहीं होते। इनकी सहयिकाऐं विशव सुन्दरी स्तर की होती है। स्टेज पर परदे, फरनीचर, ट्रैप डोर और ख़ास तौर पर बनाऐ हुऐ सामान होते हैं। शीशे और लाइट से बहुत से धोखे दिये जाते हैं। यह बात नहीं है कि इनकी आर्ट नहीं है। यह स्टेज पर हाथी ग़ायब कर देते हैं। एक जादूगर ने तो पूरा हवाई जहाज़ तक ग़ायब कर दिया। ज़िन्दा लड़की या लड़के को दो हिस्सों में काट कर फिर जोड़ देना या पानी के टैंक में डुबो दिये जाने बाद भी बच कर निकल जाना बड़े हैरत वाले कारनामें है। यह सब करने के लिये तैयारी और ख़ूबसूरत चालों से काम लिया जाता है। सब जानते है कि जादू कुछ नहीं है पर किसी तरह से हमारी नज़रों पर पर्दा डाल दिया गया है. हम ख़ुश हो कर अचम्भित हो कर ताली बजाने लगते हैं। वैसे तो कोई जादूगर अपने राज़ कभी नहीं बताता है पर जब किसी जादू का राज़ पता चलता है तो वह मामला इतना आसान होता कि अपनी अक्ल पर रोना आता है कि अरे हम कितनी आसानी से उल्लू बन गये। लड़का या लड़की कटते नहीं हैं। दो लोग इस सफ़ाई से एक बक्से मे रखे जाते हैं कि एक लगते हैं बक्से के नीचे से निकल जाने का इन्तज़ाम होता है। काले कपड़े और शीशों की मदद से बहुत सी चीज़ें छुपी रहती है। देखने वाले भी जादू पर विशवास करने लिये घर से तैयार हो कर जाते हैं और एक ऐसी मानसिक स्थिति में होते हैं जहाँ हर चीज़ विशवासनीय लगती है। जान बूझ कर बेवकूफ़ बनने के लिए ही हम जादू के शो में जाते हैं और इसी से जादूगर का काम आसान हो जाता है।
मदारी का काम देखने के लिये कोई घर से तैयार हो कर नहीं जाता पर अनायास ही मजमे में खड़ा हो जाता है और उसकी कोई ख़ास उम्मीद भी नहीं होती है। बाज़ार के मदारी का काम बड़ा मुशकिल होता है। मजमे का हर देखने वाला शक करने की मानसिकता ले कर खड़ा होता है और मदारी को नीची नज़र से भी देखता है।
आईये अब उन जादूगरों की भी बात करते हैं जो धर्म मज़हबके रंग बिरंगे कपड़े पहन कर और तरह तरह के मेकअप करके आपको अपनी दैविक शक्तियों से प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। इनके जमूरे और असिस्टेन्ट बड़ी बड़ी उँची हस्तियों और पैसे वाले होते हैं। लोग दूर दूर से इनके दर्शन के लिए आते हैं पैरों में झुकते हैं। यहाँ के टिकट तो बहुत ही मँहगे होते हैं। कहीं अपनी सालाना आमदनी का १० प्रतिशत या २० प्रतिशत तक भक्तों को देना पड़ता हैं। कहीं यह भी कहा जाता है कि अपना सबमोह त्याग दें और अपनी सारी माया गुरु के पास रखवा दें और सादे कपड़े पहन कर इनकी चाकरी करें। इनके बड़े बड़े आश्रम हैं शहर हैं जहाँ आप और पैसे दे कर रह सकते हैं। इनके बड़े बड़े दरबार होते हैं जहाँ इनकी शक्तियों का प्रर्दशन होता है। इसमें ज्यादातर तो भीड़ सम्मोहन या मास मैस्मरिज़म जैसी चीज़े होती है या बहुत ही नीचे किस्म के जादू के काम होते है़। हाथ की सफ़ाई के साथ बातों की सफ़ाई का भी प्रर्दशन होता है। एक बड़े गुरु अचानक हार और अँगुठियाँ हवा से निकाल कर अपने रईस और मशहूर भक्तों को देते रहते है। भभूत और शहद इनके हाथों से निकल आता है। इसे लोग बहुत बड़ा आशीर्वाद समझ कर गुरु चरणों में लोटपोट हो जाते हैं। गोलमोल वचन बोलना या दो अर्थी बात कहना इनका छुपा गुर होता है। स्वयं सिद्घ बातें या सेल्फ़ फ़ुलफ़िलिंग प्रोफ़सी करना भी इन्हें ख़ूब आता है। यह अच्छी बात है। मैं भी इसका उपयोग ख़ूब करता हूँ। इसमें अच्छी बातों या आगमी फ़यादों की बात बहुत विशवास के साथ की जाती है। डाक्टर, टीचर, गुरु और आपका लेखक इस ट्रिक का प्रयोग करते हैं। अगर किसी बुरे को भी यह कह दिया जाये कि वह बहुत अच्छा है तो थोड़ा बहुत अच्छा तो वह न चाहते हऐ भी हो ही जाता है। अगर किसी को कह दिया जाये कि उसका भविष्य बड़ा अच्छा है यह बात अकसर स्वयं सिद्ध हो जाती है। क्यूंकि सुनने वाला एक नया विशवास ले कर अपनी मदद ख़ुद करने लगता है।
चालाक गुरु इसी साधारण बात को ईशवर प्रदत्त शक्ति की तरह करते हैं। भूत, जिन्ह और ख़ुदाई ताक़तों के बल पर भविष्य के बड़े बड़े वादे करते हैं और मोटी मोटी फ़ीसें वसूल करते हैं। यह सबसे चालाक और मँहगे जादूगर हैं। आँखों में धूल झोंकने की कला का माहिर इनसे बड़ा कोई नहीं।
निरंजन माथुर को यह सभी काम आते थे। पर वह अपने आप को जादूगर ही कहता था। उसने कभी किसी दैवी शक्ति का दावा नहीं किया। वह यह भी कहता था कि कोई जादू नहीं है सब हाथ की सफ़ाई से आँख को धोखा देने वाली बातें हैं। वह सब को चुनोती भी देता था कि अगर उसे पकड़ सकें तो पकड़ लें। कभी कभी वह अपनी ट्रिक्स स्लो मोशन में भी दिखाता था कि देखो कितना आसान काम है। पर उसकी आसानी भी सबको हैरान करती थी। उसने बम्बई ये में अपना बड़ा नाम किया। सारे फ़िल्म स्टार उसे अपनी पार्टियों मे बुलाते थे। उसी के साथ मैं दिलीप कुमार, रहमान, डेविड और प्रदीप कुमार से मिला। बहुत से रईसों से मिला। जब कोई बड़ा मेहमान बम्बई के गर्वनर हाउस में आता था तो उनके स्वागत में निरंजन हवा से फूलों का गुलदस्ता निकाल कर पेश करता था। ताश के जादू या पैसे दुगने करने के करिशमे तो वह सड़क चलते करता था। नब्ज़ रोक देना या दिल की धड़कन रोक देना उसके बाँये हाथ का काम था। यह काम उसने मेरे एक डाक्टर मित्र के सामनें माँट्रियाल में कर दिखाया। डाक्टर को तो पसीने आ गये। हाथ में शराब ले करे उसे गुलाब की ख़ुशबू वाली राख में बदलना, हवा से मिटाईयाँ निकालना भी वह पार्टियों में करता था। वह कहता तो यह भी था कि वह पानी पर भी चल सकता है पर मैंने यह करिशमा नहीं देखा। अगर वह और ज़िन्दा रहता तो शायाद यह भी देखनो को मिलता।
तो पाठक, हमारे मामूली जादूगर निरंजन माथुर में वह सब बाते थीं जो बड़े बड़े जादूगरों, बाबा लोगों में और ख़ुदाई ख़िदमतगारों में होती हैं। वह गेरुआ कपड़े पहन कर अगर यह सब जादू दिखाता तो उसके आस पास भक्तों का हुजूम होता और सम्पदा उसके पैरों के नीचे। पर वह तो एक मदारी और जादूगर के बीच की ही चीज़ रहा। उसके के पास तो पूरी बाँहों की कमीज. भी नहीं थी। आधी बाँह की कमीज, पतलून और एक मख़मल की छोटी से बन्डी पहन कर वह पार्टियों में मेहमानों के भीच घिर कर अपना तमाशा दिखाता था। लासऐंज्लेस की मैजीशयन जमात ने उसे अपनी मीटिंग में बुलाया और वहाँ उसने सब जादूगरों के सामने अपना काम दिखाया और उनसे गोल्ड मेडल पाया।
जाने किस बुरी घड़ी में एक बड़े गुरु घंटाल की नज़र उस पर पड़ गई कि उन्होंने उसे इस काम में लगा दिया कि वह दुनिया में घूम घूम कर गुरुवरों के कामों का भन्डा फोड़े। इनमें से एक भभूत और गहने हवा से निकाल कर देने वाले वाले भगवान भी हैं। इन भगवान के भक्त करोडों हैं और इनके नाम के मन्दिर सारी दुनिया में हैं। एक पूरा शहर ही इनका है। कारुँ के ख़ज़ाने जैसी धन सम्पदा इनके पास है।
तो पाठक, इन भगवानों से हमारा छोटा सा मदारी भिड़ गया। फिर श्राप तो इसे लगना ही था। यह बम्बई में ऐसा बीमार पड़ा कि फिर कभी करशमे नही कर सका। मेरे पास इसका कोई सबूत नहीं है पर कहा यही जाता है के भगवानों की दुशमनी इसे मँहगी पड़ी और किसी ने उसे कुछ खिला दिया। पाठक, दोस्ती और दुशमनी बराबर वालों से ही ठीक होती है। |